General Studies paper 3: technology, economic development, biodiversity, environment, security and disaster management
(Section 2: Inclusive Growth)
(Section 14: protection, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment)

सन्दर्भ

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की कार्यकारी समिति ने 02 मार्च, 2017 को हुई बैठक में गंगा को स्वच्छ बनाने के अभियान में तेजी लाने के लिए करीब 19 अरब रुपये लागत वाली परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान कर दी है। जिसके तहत उत्‍तराखंड, बिहार, झारखंड और दिल्‍ली में 20 परियोजनाएँ  प्रारम्भ की जाएँगी|

प्रमुख बिंदु

  • नमामि गंगे कार्यक्रम के शीघ्र कार्यान्वयन हेतु कार्यकारी समिति द्वारा मंजूर की गई इन 20 परियोजनाओं पर करीब 415 करोड़ रुपये की लागत आएगी |
  • इन सभी परियोजनाओँ के लिए केंद्र सरकार द्वारा पूर्ण वित्त पोषण किया जाएगा । इन परियोजनाओं के प्रचालन और रख-रखाव का खर्च भी केंद्र सरकार वहन करेगी।
  • उल्लेखनीय है कि इन 20 परियोजनाओं में से 13 उत्तराखंड से सम्बद्ध है जिनमें नए मल-जल उपचार संयंत्रों की स्थापना, मौजूदा सीवर उपचार संयंत्रों का उन्नयन और हरिद्वार में मल-जल नेटवर्क कायम करने जैसे कार्य शामिल हैं।
  • विदित हो कि हरिद्वार देश के सर्वाधिक पवित्र माने जाने वाले शहरों में से एक है, जहाँ हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं।
  • अनुमोदित योजना का लक्ष्य न केवल शहर के 1.5 लाख स्थानीय निवासियों द्वारा, बल्कि विभिन्न प्रयोजनों के लिए इस पवित्र स्थान की यात्रा करने वाले लोगों द्वारा उत्सर्जित मल-जल का उपचार भी करना है।
  • उत्तराखंड में अनुमोदित अन्य परियोजनाओं में से चार परियोजनाएँ अलकनंदा नदी का प्रदूषण दूर करने से संबंधित है, ताकि नीचे की तरफ नदी की धार का स्वच्छतर प्रवाह सुनिश्चित किया जा सके।
  • इसमें गंदे पानी के नालों को नदी में जाने से रोकने के लिए उनका मार्ग बदलना, बीच मार्ग में अवरोधक संयंत्र लगाना और चार महत्त्वपूर्ण स्थानों – जोशीमठ, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग और कीर्तिनगर में नए लघु सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाना शामिल है, जिन पर करीब 78 करोड़ रूपये की लागत आएगी।
  • इनके अलावा गंगा का प्रदूषण दूर करने के लिए ऋषिकेश में 158 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली एक बड़ी परियोजना का अनुमोदन किया गया है।
  • उल्लेखनीय है कि गंगा जैसे ही पर्वत से उतरकर मैदानी भाग में प्रवेश करती है, तो ऋषिकेश से नगरीय प्रदूषक, गंगा में मिलने शुरू हो जाते हैं।
  • गंगा को इन प्रदूषकों से छुटकारा दिलाने के लिए ऋषिकेश में यह सर्व-समावेशी परियोजना शुरू करने को स्वीकृति प्रदान की गई  है । इससे न केवल सभी शहरी नालों को ऋषिकेश में गंगा में जाने से रोका जा सकेगा बल्कि उत्सर्जित जल को भी उपचार के जरिए फिर से इस्तेमाल योग्य बनाया जाएगा |
  • ऋषिकेश संबंधी इस विशेष परियोजना में लक्कड़घाट पर 26 एमएलडी क्षमता के नए एसटीपी का निर्माण किया जाएगा जिसके लिए ऑनलाइन निगरानी प्रणाली की भी व्यवस्था है।
  • राष्ट्रीय राजधानी दिल्‍ली में 665 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से उत्कृष्ट प्रदूषक मानकों के साथ 564 एमएलडी क्षमता के अत्याधुनिक ओखला मल-जल उपचार संयंत्र के निर्माण की परियोजना भी अनुमोदित की गई है। यह संयंत्र मौजूदा एसटीपी फेज़- I, II, III और IV का स्थान लेगा।
  • इसके अलावा पीतमपुरा और कोंडली में 100 करोड़ रुपये से अधिक अनुमानित लागत वाली नई मल-जल पाइपलाइनें बिछाने की दो परियोजनाएँ भी मंजूर की गई है, ताकि रिसाव को रोका जा सके।
  • पटना में कर्मालिचक और झारखंड में राजमहल में 335 करोड़ रुपये से अधिक लागत से मलजल निकासी संबंधी कार्यों का भी कार्य समिति की बैठक में अनुमोदन किया गया।
  • वाराणसी में, जहाँ वर्ष भर लाखों तीर्थ यात्री आते हैं, गंगा के प्रदूषण की समस्या का समाधान करने के लिए 151 करोड़ रुपये की, सार्वजनिक-निजी-भागीदारी अर्थात पीपीपी (Public Private Partnership) मॉडल वाली परियोजना का भी अनुमोदन किया गया है ।

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