गौरतलब है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने अहितकर और विलासिता संबंधी वस्तुओं, जैसे सिगरेट, लक्जरी कार आदि पर 28 फीसदी की उच्चतम दर पर उपकर लगाने की सीमा तय कर दी गई है। साथ ही नई अप्रत्यक्ष कराधान प्रणाली से संबंधित सभी विधेयकों को भी मंजूरी दे दी गई। हालाँकि ऐसी वस्तुओं पर वास्तविक कर देनदारी मौजूदा कर दर के बराबर होगा और उसी अनुपात में उपकर की गणना होगी, जो उपकर की अधिकतम सीमा से कम होगी, जिससे सरकार के पास भविष्य में इसे बढ़ाने की गुंजाइश होगी।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • अब केंद्रीय जीएसटी, केंद्रशासित प्रदेश जीएसटी, एकीकृत जीएसटी और मुआवजा विधेयक को मंत्रिमंडल में मंजूरी के लिये भेजा जाएगा और फिर इसे संसद के मौजूदा सत्र और संबंधित राज्य विधानसभाओं में पेश किया जाएगा, ताकि वस्तु एवं सेवा कर को जुलाई से लागू किया जा सके।
  • जिन वस्तुओं पर उपकर वसूला जाएगा, उन्हें पाँच श्रेणियों में बाँटा गया है, जिनमें पान मसाला, तंबाकू और इससे बने उत्पाद, कोयला और संबंधित ईंधन, मिनरल वाटर, शीतल पेय, लक्जरी कारें, स्टेशन वैगन एवं रेसिंग कार तथा अन्य सभी उत्पाद शामिल हैं।
  • अहितकर और विलासिता संबंधी वस्तुओं की मौजूदा दर को अधिकतम जीएसटी दर और उपकर के जरिये बरकरार रखा जाएगा। उदाहरण के लिये लक्जरी कारों पर इस समय कर की दर 40 फीसदी है। इस तरह उन पर 28 फीसदी की अधिकतम जीएसटी दर पर 12 फीसदी उपकर लगाया जाएगा।  विदित हो कि जीएसटी परिषद ने अपनी 12वीं बैठक में इन सभी बातों के अलावा मुआवजा विधेयकों पर बदलावों को भी मंजूरी दे दी है, जिन्हें संसद के मौजूदा सत्र में पेश किया जाएगा।
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